Friday, November 30, 2012

नसीहत: अब तो चेतना ही होगा।

नसीहत: अब तो चेतना ही होगा।: आम आदमी बीमारियों से हैरान है और नई-नई बीमारियो को देख और भुगत रहा है। जरा आप भी अपने आस-पास को देखे एक नए रोग की आहट समझ में आएगी। ये सभी ...

अब तो चेतना ही होगा।

आम आदमी बीमारियों से हैरान है और नई-नई बीमारियो को देख और भुगत रहा है। जरा आप भी अपने आस-पास को देखे एक नए रोग की आहट समझ में आएगी। ये सभी बीमारिया मिलावट की है। नित नए युवा  भी अब सुगर के चपेट में आ रहे है। आखिर इसके जड़ में भी जाना होगा अपने खान-पान की निगरानी करनी ही होगी। गुर्दे फेल हो रहे है। फेफड़े रक्त साफ करते-करते हाफ रहा है।

आखिर कितनी सफाई शरीर की करे ये भी मिलावट के जहर को ख़त्म करते करते काम करना ही बंद कर देते है या फिर अपने को सक्षम पाते है। ऐसी हालात में हमें ही सचेत होना पड़ेगा। आज हमारे पड़ोस में भी रहने वाला दुकानदार बड़े ही विश्वाश के साथ विश्वश्घात कर रहा है। सब कुछ जान कर भी हमें और हमारे विश्वाश का कुछ लाभ के लिए हत्या कर देता है।

हमें अपने जीवन के लिए ही सही अब तो कुछ सचेत होकर समाज से मिलावट के जहर को मितान ही होगा और चेतना होगा।

Tuesday, November 13, 2012

नसीहत: क्या धर्म यही सिखाता है ?

नसीहत: क्या धर्म यही सिखाता है ?: दीपावली को सुखमय बनाने और कुछ पाने की चाह में आम आदमी अमावश्या के अवसर पर चित्रकूट में जाने और दर्शन की होड़ लगाते है। तब जान तक की कोई परव...

क्या धर्म यही सिखाता है ?

दीपावली को सुखमय बनाने और कुछ पाने की चाह में आम आदमी अमावश्या के अवसर पर चित्रकूट में जाने और दर्शन की होड़ लगाते है। तब जान तक की कोई परवाह भी नहीं करता है। जैसा की घाटमपुर स्टेशन में ली गति एक फोटो बयान कर रही है। ये शासन और प्रशासन भी मूक हो गया लोग अपनी जान को जोखिम में डाल कर चित्रकूय का सफ़र भी कर आये। किसी ने कुछ नहीं भी कहा। भला धर्म कहा ये कहता है आप अपनी जान को जोखिम में डाले और दूसरो की भी यात्रा को दुखमय बनाए।

देखे जागरण कानपुर (घाटमपुर) में प्रकाशित व महेश जी के द्वारा ली गयी एक फोटो .......


अब तो कुछ आप भी कहे और सीख दे सभी को।

   




Monday, November 12, 2012

नसीहत: Burning garbage dump in India, why?

नसीहत: Burning garbage dump in India, why?: Today, every town will get mixed into the burning pile of garbage. How long does this law not only will continue playing with human life....

Burning garbage dump in India, why?



Today, every town will get mixed into the burning pile of garbage. How long does this law not only will continue playing with human life. Paradise constantly talking to the control laws do not to shame that after all? What is the cause?

I am living in small towns and never will leave early in the morning the place - a place to get a burning dumpster. And not even the authorities nor the media attention is. Why keep stealing eye and live Waters Holy of human life?

Never burn garbage and Kanpur in the big city is burning comes reports. However, government officials do not take advice. No need to explain the issue to be discussed. And governments do not understand something.

Today's post is needed to clean all these authorities and related training to employees. To tell them how to transport the garbage disposal and how it should be.



नसीहत: कूड़ा जलाने पर अब तो सरकार को कुछ करना ही चाहिए !

नसीहत: कूड़ा जलाने पर अब तो सरकार को कुछ करना ही चाहिए !: आज हर कस्बे में कूड़ा के ढेर जलाते हुए मिल जायेगे। आखिर कब तक इस तरह से कानून ही नहीं मानव जीवन से खिलवाड़ चलता रहेगे। लगातार प्रदिशन की नि...

कूड़ा जलाने पर अब तो सरकार को कुछ करना ही चाहिए !

आज हर कस्बे में कूड़ा के ढेर जलाते हुए मिल जायेगे। आखिर कब तक इस तरह से कानून ही नहीं मानव जीवन से खिलवाड़ चलता रहेगे। लगातार प्रदिशन की नियंत्रण की बाते करते हुए कानून बनाने वाले आखिर कतो नहीं करते शर्म ? कारन क्या है ?

मै एक छोटे से कसबे में रह रहा हूँ और कभी भी जल्दी सुबह निकालता हूँ तो जगह- जगह कूड़े के ढेर जलाते हुए मिल जाते है। कभी भी इस और ना तो मिडिया का ध्यान जाता है और न ही अधिकारिओ का। आखिर क्यों आँख चुराते रहते है और जलवाते रहते है मानव जीवन की होली ?

जब कभी कानपुर जैसे बड़े महानगर में भी कूड़ा जलने और जलाने की खबरे भी आती रहती है। फिर भी नसीहत नहीं ले पाते है सरकारी अधिकारी। जरुरत भी नहीं समझाते इस मुद्दे को लेकर चर्चा करने की। और सरकारे भी नहीं समझती है कुछ करने की।

आज जरुरत पद रही है की इन सभी अधिकारिओ और कर्मचारियो को सफाई से सम्बंधित प्रशिक्षण की। इन्हें बताया जाए किस प्रकार से कूड़े का परिवहन किया जाए और कैसे इसका निस्तारण किया जाए। 

Thursday, November 1, 2012

नसीहत: BBC- भारत में दवा परीक्षणों की अंधेरी दुनिया

नसीहत: BBC- भारत में दवा परीक्षणों की अंधेरी दुनिया: बीबीसी के अनुसार भारत में दवा परीक्षणों की अंधेरी दुनिया बिना जानकारी और सहमति के भारत में गरीबों पर नई दवाओं के परीक्षण किए जाने का ...

नसीहत: BBC भारत: दवाओं के परीक्षण से दो साल में 1144 मौते...

नसीहत: BBC भारत: दवाओं के परीक्षण से दो साल में 1144 मौते...: BBC- HINDI के समाचार के अनुसार भारत: दवाओं के परीक्षण से दो साल में 1144 मौतें  बुधवार, 22 अगस्त, 2012 को 16:00 IST सरकारी आंक...

BBC- भारत में दवा परीक्षणों की अंधेरी दुनिया

बीबीसी के अनुसार

भारत में दवा परीक्षणों की अंधेरी दुनिया

बिना जानकारी और सहमति के भारत में गरीबों पर नई दवाओं के परीक्षण किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है कि वो उन मामलों में जल्द से जल्द जांच कराएं जिनमें मरीज़ों की मौत हो गई.
मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के महाराज यशवंत राव अस्पताल में 2009 में अपनी सास चंद्रकला बाई का इलाज कराने पहुंची नीतू सोडी कहती हैं कि जब उन्हें इस बात का पता चला तो उन्हें यकीन नहीं हुआ.
वो कहती हैं, ''हम दलित हैं और आमतौर पर जब हम अस्पताल जाते हैं तो हमें पांच रुपए का एक वाउचर मिलता है, लेकिन डॉक्टर ने हमसे कहा वो हमें 125,000 रुपए की एक दवा देंगे.''
चंद्रकला बाई को कुछ समय से सीने में दर्द की शिकायत थी, जिसके चलते नीतू सोडी और उनके पति इलाज के लिए महाराज यशवंत राव अस्पताल पहुंचे थे.
अस्पतालों में मरीज़ों की लंबी लाइन और घंटो इतज़ार एक आम समस्या है लेकिन चंद्रकला बाई को हाथों-हाथ अस्पताल में भर्ती कर लिया गया था.

बिना स्वीकृति परीक्षण

नीतू कहती हैं कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनकी सास को दवाओं के परिक्षण के लिए भर्ती किया जा रहा है.
उन पर 'टोनापोफाइलिन' और 'बायोजेन आइडैक' नामक दवाओं का परीक्षण किया गया. नीतू और उनके पति दोनों ही पढ़-लिख नहीं सकते और जहां तक उन्हें याद है जिन दस्तावेज़ों पर उन्होंने हस्ताक्षर किए उनमें से कोई भी सहमति पत्र नहीं था.
"''हम दलित हैं और आमतौर पर जब हम अस्पताल जाते हैं तो हमें पांच रुपए का एक वाउचर मिलता है, लेकिन डॉक्टर ने हमसे कहा वो हमें 125,000 रुपए की एक दवा देंगे.'' "
नीतू सोडी, मरीज़ की परिजन
दवा लेने के कुछ समय बाद चंद्रकला बाई को हृदय संबंधी गड़बड़ियों ने घेर लिया और एक महीने के अंदर दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई.
'बायोजेन आइडैक' नामक कंपनी इस परीक्षण के लिए ब्रिटेन में पंजीकरण करा चुकी है और कंपनी का कहना है कि मरीज़ों में दिल के दौरे के बढ़ते मामलों को देखते हुए उन्होंने परीक्षण पर रोक लगा दी. चंद्रकला बाई की मौत के बारे में कंपनी को कोई जानकारी नहीं है.
लेकिन चंद्रकला बाई का मामला अकेला मामला नहीं है. एक दूसरी कंपनी के लिए किए गए ऐसे ही परीक्षण के बारे में बताते हुए नारायण सुरवैया कहते हैं कि उनसे और उनकी मां तीज़ूजा बाई से न यह पूछा गया कि वो दवाओं के परीक्षण में शामिल होना चाहते हैं या नहीं और न ही उन्हें बताया गया कि उन पर परीक्षण किया जा रहा है.
तीज़ूजा बाई अपने पैरों का इलाज कराने अस्पताल पहुंची थीं. उनसे कहा गया कि एक धर्मार्थ संस्था उनके इलाज का खर्च वहन करेगी. कुछ ही समय में तीज़ूजा बाई के दोनों पैरों को लकवा मार गया.

कब होगी जांच?

नारायण कहते हैं, ''मैंने डॉक्टरों से कहा कि दवा का असर खराब हो रहा है लेकिन उन्होंने कहा कि दवा चालू रखें और यह समस्या धीरे-धारे खत्म हो जाएगी.''
कुछ हफ्तों बात तीज़ूजा बाई की भी मौत हो गई.
महाराज यशवंत राव अस्पताल में अब तक कुल 53 लोगों पर परीक्षण किए जा चुके हैं. ये परीक्षण ब्रिटेन और जर्मनी की दवा कंपनियों की ओर से प्रायोजित थे. इनमें आठ लोगों की मौत हो गई.
इस बात का कोई सीधा सबूत नहीं कि मरीज़ों की मौत दवाओं के सेवन से हुई लेकिन इन मामलों में कोई चिकित्सीय जांच भी नहीं हुई जिससे आरोप साफ हो सकें.
जिन भी अस्पतालों में परीक्षणों के मामले सामने आए हैं उनमें मरने वालों के परिजनों को कोई मुआवज़ा नहीं दिया गया है.

ज्यादातर पीड़ित गरीब

"ये लोग केवल गरीबों को ही चुनते हैं. ऐसे लोग जो पढ़े-लिखे नहीं है और उन्हें इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं कि चिकित्सीय परीक्षण क्या होता है."
डॉक्टर आनंद राय
ज्यादातर पीड़ित परिवार बेहद गरीब हैं और उनसे मिलने पर एक ही बात उभर कर सामने आती है.
अस्पताल पहुंचने पर उन्हें हाथों-हाथ लिया गया और उन्हें ऐसी दवाएं देने की पेशकश की गई जो उनकी जेब से बाहर थीं. भारत में दवाओं के परीक्षण से जुड़े कानून का उल्लंघन करते हुए उनसे स्वीकृति पत्र पर हस्ताक्षर भी नहीं कराए गए.
महाराज यशवंत राव अस्पताल के मरीज़ों का कहना है कि ये अवैध परीक्षण अस्पताल से जुड़े डॉक्टर अनिल बाहरानी की देखरेख में किए गए.
मामले सामने आने पर बाहरानी पर गैर कानूनी रुप से दवा कंपनियों से पैसे लेने, विदेश यात्राएं करने और मरीज़ों की बिना सहमति के उनपर दवाओं के परीक्षण करने का मामला चलाया जा रहा है.
डॉक्टर अनिल बाहरानी ने तमाम कोशिशों के बाद भी बीबीसी से बात करने से इनकार कर दिया. हालांकि हमारे उनके क्लिनिक पर पहुंचने के दो दिन बाद अस्पताल ने तुरत-फुरत उनका तबादला भी कर दिया.
इन परीक्षणों के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाले इसी अस्पताल के एक दूसरे डॉक्टर आनंद राय को न सिर्फ अस्पताल से निकाल दिया गया बल्कि उन्हें बेइज़्ज़त भी किया गया. तब से वो लगातार इन मामलों की जांच कर रहे हैं.
डॉक्टर आनंद कहते हैं, ''ये लोग केवल गरीबों को ही चुनते हैं. ऐसे लोग जो पढ़े-लिखे नहीं है और उन्हें इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं कि चिकित्सीय परीक्षण क्या होता है.''

परीक्षणों की मान्यता पर सवाल

"मैं इन कंपनियों से एक ही बात कहना चाहता हूं कि गरीबों पर ये परीक्षण न करें. हमारे पास खाने-कमाने को पहले ही कुछ नहीं. बीमारी हो जाए तो पूरा घर उसे भुगतता है. क्या वो ये परीक्षण अपने घरवालों पर करेंगे?"
रामधर श्रीवास्तव, दवा परीक्षण के पीड़ित
अस्पताल भी यह मानता है कि चिकित्सीय परीक्षणों को लेकर उनसे कुछ गड़बड़ियां हुई हैं. लेकिन ये कहानी सिर्फ भारत के एक अस्पताल की नहीं.
2005 में भारत सरकार ने दवा परीक्षणों से जुड़े कानूनों में ढील दी और इसके बाद कंपनियों में देश के अंग्रेज़ीदां डॉक्टरों और करोड़ों की संख्या में मौजूद गरीब, निरक्षर लोगों का फायदा उठाने की होड़ लग गई.
भोपाल गैस कांड के बाद यूनियन कार्बाइड से मिले मुआवज़े के पैसों से बनाए गए भोपाल मेमोरियल अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले गैस पीड़ितों पर भी चिकित्सीय परीक्षण किए गए.
बिना किसी जानकारी के किए गए ऐसे ही एक परीक्षण का हिस्सा रहे रामधर श्रीवास्तव अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं.
वो कहते हैं, ''मैं इन कंपनियों से एक ही बात कहना चाहता हूं कि गरीबों पर ये परीक्षण न करें. हमारे पास खाने-कमाने को पहले ही कुछ नहीं. बीमारी हो जाए तो पूरा घर उसे भुगतता है. क्या वो ये परिक्षण अपने घरवालों पर करेंगे?''
जानकारों का मानना है कि ये मामला कानूनी और चिकित्सा क्षेत्र की बारीकियों से जुड़ा है. इस मामले पर संसद में पेश हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक नियंत्रण और निगरानी रखने वालों की कमी और लचर कानून दोनों इन हालात के लिए ज़िम्मेदार हैं.
लेकिन सबसे बड़ी विडम्बना ये है कि जिस तरह ये परीक्षण किए जा रहे हैं उससे इन दवाओं और उनके परिक्षणों की मान्यता और उत्कृष्टता पर भी सवाल खड़े हो 


BBC भारत: दवाओं के परीक्षण से दो साल में 1144 मौतें

BBC- HINDI के समाचार के अनुसार

भारत: दवाओं के परीक्षण से दो साल में 1144 मौतें

 बुधवार, 22 अगस्त, 2012 को 16:00 IST

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 और 2011 में दवाइयों के परीक्षणों में मारे गए लोगों में 1106 लोग ऐसे थे जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मरीज थे.
दरअसल बाजार में लाए जाने से पहले नई दवाइयों का मरीजों पर परीक्षण किया जाता है, ताकि इसके असरदायक होने या इससे होने वाले किसी प्रकार के संभावित दुष्प्रभावों का पता चल सके.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा में अपने लिखित जवाब में बताया, “दवाओं के परीक्षण से गंभीर बीमारी से ग्रस्त वर्ष 2010 में 668 और 2011 में 438 लोगों की मौत हुई है.”

दवाओं का गलत प्रयोग

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों की मौत की वजह दवाओं के गलत प्रभाव या इस्तेमाल हो सकता है.
"दवाओं के परीक्षण से गंभीर बीमारी से ग्रस्त वर्ष 2010 में 668 और 2011 में 438 लोगों की मौत हुई है."
गुलाम नबी आजाद
आजाद ने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की स्थाई समिति ने अपने रिपोर्ट में सेंट्रल ड्रग्स स्टैडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के काम काज के तरीकों और दवाओं को स्वीकृति दिए जाने की प्रक्रिया में कई खामियां चिन्हित की.
पीटीआई के अनुसार आजाद ने कहा, “स्थाई समिति मीडिया में आई उन खबरों का भी अवलोकन किया है जो गरीबों पर दवाओं के परीक्षण के तौर-तरीको और इस प्रक्रिया में होने वाली मौतों के मामलों से संबंधित है.”
परीक्षण में शामिल होने वाले मरीजों की सुरक्षा के बारे में बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “देश में दवाओं के परीक्षण के लिए प्रयोग किए जाने वाले लोगों की सुरक्षा से संबंधित कई मामले सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाइकोर्ट में लंबित हैं

Monday, September 3, 2012

नसीहत: जरा समझ भी ले आप जो वेब/नेट पर कर रहे है वो अपराध ...

नसीहत: जरा समझ भी ले आप जो वेब/नेट पर कर रहे है वो अपराध ...: देखे नव भारत  टाईम्स का  लेख : बालेन्दु शर्मा दाधीच जी  नवभारत टाइम्स  |  Sep 2, 2012, 04.48PM IST अनजाने में होता साइबर क्राइम इं...

जरा समझ भी ले आप जो वेब/नेट पर कर रहे है वो अपराध तो नहीं है ?

देखे नव भारत  टाईम्स का  लेख : बालेन्दु शर्मा दाधीच जी 
नवभारत टाइम्स | Sep 2, 2012, 04.48PM IST

अनजाने में होता साइबर क्राइम


इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले करीब-करीब हर शख्स ने कोई न कोई साइबर क्राइम जरूर किया है। कानूनी नहीं तो नैतिक अपराध तो किया ही है। इनमें से ज्यादातर को तो इसका अंदाजा तक नहीं होता। वे कहीं से भी कोई चित्र, लेख या विडियो कॉपी-पेस्ट करते समय जरा भी नहीं झिझकते। इंटरनेट पर ऐसे तमाम काम हैं, जो साइबर क्राइम के तहत आते हैं। इनके बारे में बता रहे हैं बालेंदु शर्मा दाधीच:

कॉपी-पेस्ट या सामग्री की चोरी
- हर क्रिएटिव चीज बनाने वाले के पास एक खास हक होता है जो उसे अपनी सामग्री को गैरकानूनी ढंग से नकल किए जाने के खिलाफ सुरक्षा देता है। इसे कॉपीराइट कहते हैं।
- आपके लेख, कहानी, कविता, व्यंग्य, फोटो, संगीत की धुन, सॉफ्टवेयर, विडियो, कार्टून, एनिमेशन, किताब, ई-बुक, वेबसाइट वगैरह पर आपको यह खास हक हासिल है। कोई भी शख्स आपकी इजाजत के बिना आपकी रचना की कॉपी नहीं कर सकता और न ही उसे दूसरों को दे सकता है। ऐसा करना कॉपीराइट कानून का उल्लंघन है और आप उसके खिलाफ अदालत जा सकते हैं।
- कॉपीराइट लेने की एक कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन अगर ऐसा नहीं भी करते, तो भी अपनी रचना पर आपका ही हक है।
- इसी तरह अगर आप किसी और का फोटो उसकी लिखित मंजूरी के बिना अपने फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्ट करते हैं तो वह साइबर क्राइम है। गूगल इमेज या दूसरी इमेज होस्टिंग वेबसाइटों से अपनी पसंद का कोई फोटो लेकर उसे अपने ब्लॉग, सोशल नेटवर्किंग ठिकाने, वेबसाइट या पत्र-पत्रिका में इस्तेमाल करना भी उसी कैटिगरी में आता है।
- गूगल एक सर्च इंजन भर है, वह फ्री डाउनलोड साइट नहीं है। इसीलिए वह किसी भी पिक्चर के साथ उस वेब पेज को भी दिखाता है, जहां से उसे ढूंढा गया है। ऐसा करके वह पिक्चर चुराए जाने के मामले में किसी भी तरह की जिम्मेदारी से आजाद हो जाता है।

क्या करें
- अगर आपको गूगल इमेज सर्च पर मौजूद कोई फोटो इस्तेमाल करना है, तो कायदे से उस वेब पेज के संचालक से इजाजत लेनी चाहिए।
- अगर कोई शख्स अपनी रचना को लेकर ज्यादा ही गंभीर हो, तो यह छोटी सी चोरी आपको भारी पड़ सकती है। जिस गूगल के जरिये आपने वह लेख, फोटो या विडियो ढूंढा है, उसी के जरिये आपकी चोरी भी पकड़ी जा सकती है।

मजेदार साभार
- कुछ ब्लॉगों पर बड़ी दिलचस्प बातें नजर आती है। ब्लॉगरों ने गूगल इमेजेज से फोटो का इस्तेमाल किया और बतौर सावधानी नीचे साभार गूगल लिख दिया।
- गूगल पर दिखने वाले सर्च नतीजों, फोटो वगैरह पर गूगल का कोई मालिकाना हक नहीं है। वे तो महज रेफरेंस के तौर पर दिए गए हैं, जिससे आप सही ठिकाने तक पहुंच सकें।
- आभार ही जताना है तो उस वेबसाइट का जताइए, जहां से गूगल ने उसे ढूंढा है।

चाइल्ड पॉर्नोग्रफी देखना
- अगर आप जाने या अनजाने अपने इंटरनेट कनेक्शन के जरिये चाइल्ड पॉर्नोग्रफी (बच्चों के अश्लील चित्र, विडियो, लेख आदि) देखते हैं तो वह साइबर क्राइम है।
- आपने ऐसी किसी सामग्री को अपने किसी दोस्त को फॉरवर्ड कर दिया तो आप एक और साइबर क्राइम कर चुके हैं।
- 18 साल से कम उम्र वालों से संबंधित अश्लील सामग्री देखना, इंटरनेट से भेजना और सहेजना साइबर क्राइम है।
- इन्हें न खुद देखें, न किसी को फॉरवर्ड करें।

लोगो की चोरी
- इंटरनेट पर लोगो, आइकंस, प्रतीक चिह्नों, ट्रेडमार्क वगैरह की चोरी भी आम है।
- नया काम खोलना है या नई वेबसाइट बनानी है लोगो के लिए इंटरनेट सर्च से बेहतर जरिया क्या होगा?
- अच्छा सा लोगो दिखाई दिया और आपने उसे कॉपी कर इस्तेमाल कर लिया या किसी डिजाइनर की सेवा ली जिसने झटपट इंटरनेट से किसी कंपनी का अच्छा सा लोगो इस्तेमाल कर आपका विजिटिंग कार्ड, ब्रोशर और लेटरहेड तैयार कर दिया। ऐसा करके आपने न सिर्फ कॉपीराइट का उल्लंघन कर चुके हैं बल्कि ऑनलाइन ट्रेडमार्क के उल्लंघन मामले में भी आपको दोषी करार दिया जा सकता है।
- ऐसे किसी भी लोगो या आइकन का प्रयोग अपने बिजनेस आदि के लिए न करें।

वाई-फाई का दुरुपयोग
- जुलाई 2008 में अहमदाबाद बम विस्फोटों के बाद उनकी जिम्मेदारी लेते हुए आतंकवादियों ने जो ईमेल भेजा था, वह आपके-हमारे जैसे ही किसी आम इंटरनेट यूजर के वाई-फाई कनेक्शन का इस्तेमाल करके भेजा था। जांच एजेंसियों ने पता लगाया कि यह ईमेल नवी मुंबई के एक ?लैट में लगे वायरलेस इंटरनेट कनेक्शन के जरिये आया था। जाहिर है, उन्होंने यही निष्कर्ष निकाला कि जिस घर से मेल भेजा गया, वह किसी न किसी रूप में हमलावरों से जुड़ा हुआ होगा, लेकिन इस फ्लैट में रहता था मल्टिनैशनल कंपनी में काम करने वाला अमेरिकी नागरिक केनेथ हैवुड। अब उसे समझ आया कि इंटरनेट कनेक्शन लगाने वाले इंजिनियर ने क्यों कहा था कि उसे अपने वाई-फाई नेटवर्क का पासवर्ड जल्दी ही बदल लेना चाहिए। दरअसल, हैवुड के वाई-फाई कनेक्शन में कोई सिक्युरिटी सेटिंग नहीं की गई थी और आस-पास से गुजरता कोई भी शख्स हैवुड के कनेक्शन का इस्तेमाल कर सकता था। आतंकवादियों ने यही किया और हैवुड एक आतंकवादी मामले में गिरफ्तार होते-होते बचा।
- अगर कोई अपराधी आपके इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करते हुए साइबर क्राइम करता है तो पुलिस उसे भले ही न ढूंढ पाए, आप तक जरूर पहुंच जाएगी और नतीजे भुगतने होंगे आपको।
- अगर वाई-फाई इंटरनेट कनेक्शन इस्तेमाल करते हैं तो उसे पासवर्ड प्रोटेक्ट करना और एनक्रिप्शन का इस्तेमाल करना न भूलें।

वायरस, स्पाईवेयर
- अगर आपके कंप्यूटर पर किसी वायरस या स्पाईवेयर ने कब्जा जमा लिया है और वह जोम्बी में तब्दील हो गया है तो समझिए, आप अपने कंप्यूटर और डेटा की असुरक्षा के साथ-साथ साइबर क्राइम में भी फंस सकते हैं। मुमकिन है, आप किसी परोक्ष साइबर क्राइम में हिस्सेदार बन रहे हों।
- कुछ वायरस और स्पाईवेयर न सिर्फ आपके कंप्यूटर के डेटा और निजी सूचनाएं चुराकर अपने संचालकों तक भेजते हैं बल्कि आपके संपर्क में मौजूद दूसरे लोगों तक अपनी प्रतियां पहुंचा देते हैं। कभी इंटरनेट के जरिये, कभी ईमेल के जरिये तो कभी लोकल नेटवर्क के जरिये। जिन लोगों के कंप्यूटर में आपके जरिये वायरस या स्पाईवेयर पहुंचा और कोई बड़ा नुकसान हो गया, उनकी नजर में दोषी कौन होगा? आप। ऐसे मामलों में आप अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
- कंप्यूटर में अच्छा एंटिवायरस, एंटिस्पाईवेयर और फायरवॉल जरूर लगवाएं। ये सिर्फ आपकी साइबर सुरक्षा के लिहाज से ही जरूरी नहीं है बल्कि इसलिए भी है कि कहीं आप अनजाने में कोई साइबर अपराध न कर बैठें।

किसी का अकाउंट खोलना
- कुछ लोग अपने दोस्तों और साथियों के ईमेल अकाउंट, फेसबुक वगैरह का पासवर्ड ढूंढने की कोशिश करते हैं और कभी-कभी सफल भी हो जाते हैं। हो सकता है, आप महज मौज-मस्ती या मजाक के लिए ऐसा कर रहे हों लेकिन अगर आप किसी का पासवर्ड हासिल करने के बाद उसके खाते में लॉग-इन करते हैं तो आप साइबर क्राइम कर रहे हैं।
- ऐसा तब भी होता है, जब किसी ने आप पर भरोसा करके आपको अपना पासवर्ड बताया हो। यह खाता ईमेल, सोशल नेटवर्किंग, ब्लॉग, वेबसाइट, ऑनलाइन स्टोरेज सविर्स, ई-कॉमर्स साइट, इंटरनेट-बैंकिंग जैसा हो सकता है।
- किसी की प्राइवेसी में सेंध लगाने पर आप डेटा प्रोटेक्शन कानून के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी कानून 2000 की धारा 72 के तहत दोषी करार दिए जा सकते हैं।
- किसी का पासवर्ड चुराकर उसका अकाउंट खोलने की कोशिश न करें। साथ ही अगर कोई साथी कहे कि मेरा ईमेल खोलकर देख लेना, यह मेरा पासवर्ड यह है, तो उससे माफी मांग लेने में ही भलाई है।

सॉफ्टवेयर पायरेसी
- भारत के ज्यादातर कंप्यूटर यूजर किसी न किसी सॉफ्टवेयर का पाइरेटेड वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं। चाहे विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम हो, ऑफिस सॉफ्टवेयर सूइट हों या फिर ग्राफिक्स, पेजमेकिंग के सॉफ्टवेयर।
- अब सॉफ्टवेयरों के भीतर एडवांस किस्म के पाइरेसी प्रोटेक्शन और मॉनिटरिंग सिस्टम आने लगे हैं और हो सकता है आपके बारे में भी कंपनियों को जानकारी हो।
- ऐसे सॉफ्टवेयरों का इस्तेमाल करना साइबर क्राइम के तहत आता है। हमेशा ऑरिजनल सॉफ्टवेयर ही यूज करें।

गूगल क्लिक फ्रॉड
- इंटरनेट पर विज्ञापनों के बदले भुगतान की व्यवस्था थोड़ी अलग है। यह विज्ञापनों को क्लिक किए जाने की संख्या पर आधारित है। जैसे दस क्लिक यानी दो डॉलर या करीब 110 रुपये।
- ऐसे में कुछ लोग खुद ही अपने ब्लॉगों पर लगे विज्ञापनों को क्लिक करते रहते हैं या फिर कुछ दूसरे लोगों के साथ गठजोड़ कर लेते हैं। उन्हें पता नहीं कि इंटरनेट पर ऐसे फर्जी क्लिक की निगरानी रखी जा सकती है।
- इस तरह के क्लिक से बचें। यह बड़ा आर्थिक अपराध है और पता लगने पर आपके विज्ञापन तो बंद हो ही सकते हैं, भारी-भरकम जुर्माना या दूसरी सजा भी मिल सकती है।

बैंडविड्थ की चोरी
- कुछ लोग अपनी वेबसाइट पर दूसरी जगहों से ली गई भारी-भरकम ग्राफिक फाइलें (कुछ एमबी के फोटो या विडियो आदि) डालने के लिए शॉर्टकट अपनाते हैं।
- वे फाइलों को अपनी वेबसाइट पर सीधे नहीं डालते बल्कि ऑरिजनल वेबसाइट से ही उन्हें लिंक कर देते हैं। होता यह है कि विडियो या चित्र दिखता तो आपकी वेबसाइट पर है लेकिन असल में वह अपनी ऑरिजनल वेबसाइट पर ही लगा हुआ है, आपके वेब सर्वर पर नहीं है।
- यहां आप दो तरह के साइबर क्राइम कर रहे हैं। पहला कॉपीराइट संबंधी और दूसरा बैंडविड्थ की चोरी।
- बैंडविड्थ की चोरी को ऐसे समझ सकते हैं। हर वेबसाइट को डेटा डाउनलोड का एक खास कोटा मिला होता है और इस सीमा से बाहर जाने पर उसके संचालक को अलग से पैसे का भुगतान करना होता है। जब आप किसी और की साइट पर मौजूद भारी-भरकम विडियो को लिंक करके अपनी साइट पर लगाते हैं तो आपकी साइट पर आने वाले हर विजिटर के लिए वह विडियो ओरिजनल साइट से डाउनलोड होता है। डाउनलोड की इस प्रक्रिया में उसकी बैंडविड्थ खर्च होती है, जबकि आप अपनी बैंडविड्थ बचा लेते हैं।
- यह किसी अनजान व्यक्ति की जेब काटने जैसा है। हमेशा अपनी बैंडविड्थ ही खर्च करें, दूसरों की नहीं।

कुछ और साइबर क्राइम
- साइबर स्क्वैटिंग : किसी मशहूर ब्रैंड, कंपनी, संगठन, इंसान आदि के नाम से जुड़ा डोमेन नेम अनधिकृत रूप से अपने नाम से बुक करवा लेना।
- ऑनलाइन मानहानि : अपने ब्लॉग, वेबसाइट, सोशल नेटवकिर्ंग ठिकाने या दूसरे इंटरनेट ठिकाने पर किसी के बारे में अपमानजनक या अश्लील टिप्पणी करना।
- कारोबारी डेटा : किसी ग्राहक द्वारा मुहैया कराए जाने वाले गोपनीय कारोबारी डेटा की कॉपी बनाकर अपने पास रखना।
- वेबसाइट, डोमेन नेम पर कब्जा : भारत में कई वेब डिवेलपमेंट कंपनियां ऐसा करने की दोषी पाई गई हैं। अपने ग्राहकों के लिए डोमेन नेम बुक कराते, वेब होस्टिंग स्पेस लेते और इंटरनेट सेवा मुहैया कराते समय वे उनका सबसे खास यूजरनेम और पासवर्ड अपने कब्जे में रख लेते हैं और फिर उसी के दम पर ग्राहकों को तंग करते हैं।
- डिजाइन की चोरी : किसी वेबसाइट, ब्लॉग, ई-बुक आदि की बिना मंजूरी हू-ब-हू नकल कर लेना। किसी की टेंप्लेट को अनधिकृत रूप से इस्तेमाल कर लेना।

Wednesday, January 11, 2012

आज सोच लो नहीं तो पांच वर्षो तक पछताना पड़ेगा.

भारत के संविधान की दुनिया में बड़ाई भी की जाती है. लेकिन यह लोकतंत्र की बहुत ही बड़ी असफलता बनती जा रही है. आज जब वोटो की गिनती की बात होती है तब इन नेताओ को हमारा ध्यान आता है. ये चुनाव चाहे राज्य के हो चाहे देश के हो , चाहे पंचायत स्तर के हो, सभी में यह बात लागु होती है. बड़ी बड़ी बात करने वाले भी अपने कार्य क्षेत्र में जाकर अपनी जाती की गडाना करने लगते है. तमाम नेता तो आज जाती गडाना के कारन ही अपने पूरे परिवार को राजनीती में रख कर जाती की ही कसम खिलाकर सत्ता की धुरी बनाना चाहते है.